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जय श्री बालाजी । जय श्री दादोजी । "www.akshaykripa.com" वेबसाईट में दिखाये जाने वाले फोटो तथा विडियो एवं दादोजी श्री अखाराम जी के चमत्कारिक भक्ति, शक्ति और भावनात्मक उल्लेख उनके श्रध्दालुओं की आपबीती घटनाओ से सम्बन्धित है । हम किसी व्यक्ति तथा समुदाय की भावना को ठेस पहुँचाना नही चाहते है । हम सिर्फ दादोजी के भक्तों की आस्था और मान्यताओं को दिखा रहे है । इसमे हम किसी भी तरह का दावा नही करते है एवं किसी भी व्यक्ति तथा समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुँचे तो हम क्षमाप्रार्थी है ।

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आपको यह जानकर प्रसन्नता होगी कि मै आपको एक ऐसे धाम के बारे मे अवगत कराने जा रहा हुँ जहाँ पर आने वाले हर भक्त की मनोकामना श्री अखारामजी दादोजी की कृपा से पुर्ण होती है ।काफी वर्ष पहले परसनेऊ गांव मेँ श्री अखारामजी महाराज का जन्म पलोङ परिवार दाधीच वंश मेँ पिता श्री हरजी राम जी एवं माताश्री सुखी बाई के घर मेँ भादवा बदी पंचमी के शुभ दिन हुआ । बाल्यकाल मेँ ही वे हनुमानजी महाराज की सेवा करने लगे । उसी समय मे श्री मोहनदासजी महाराज (सालासर) , श्री राघवदासजी महाराज (मीरण) , श्री केशवदासजी महाराज (सारङी) आदि महान सन्त हुये व श्री हनुमानजी महाराज की भक्ति करके जनहित मेँ वरदान व सिद्धियां प्राप्त की ।

। भक्त शिरोमणि श्री दादाजी अखारामजी महाराज परसनेऊ गांव के पास ही नाडिया (तालाब) के समीप कैर व कमुठोँ के पास श्री बालाजी महाराज की धुणी रमाते एवं गायेँ चरातेँ थे ।श्रीदादोजी महाराज को गाँव के नागरिक गुंगीया (भोला) कहकर पुकारते थे । श्री रामभक्त श्री हनुमान जी महाराज ने श्री दादाजी महाराज की भक्ति से प्रसन्न होकर वहीँ पर उन्हेँ प्रथम दर्शन दिये । वरदान स्वरुप श्री दादाजी महाराज को वचन सिद्धि प्रदान की । सर्प आदि के जहर व भुतप्रेत आदि के प्रभाव से मुक्ति के लिये भभूति व कलवाणी रुपी औषध का वरदान दिया जिससे आज भी वहां भक्तोँ के दुःख क्षणभर मेँ कट जाते हैँ । कुछ ही समय पश्चात दङिबा गांव की काँकङ मेँ एक कुम्हार के खेत मेँ श्री बालाजी महाराज की मुर्ति निकली । कुम्हार को आकाशवाणी के द्वारा बताया गया की ' इस मुर्त को तुम बैलगाङी मेँ ले चलो जहाँ गाङी रुकेगी वही पर इस मुर्ति की स्थापना होगी ' वह बैलगाङी सिद्धपीठ धाम परसनेऊ मेँ आकर रुकी । वह मुर्ति आज भी स्थित हैँ । इधर भक्त शिरोमणी श्री दादाजी महाराज ने काफी समय श्री हनुमान भक्ति व जनसेवा करने के पश्चात समाधि लेने का निश्चय किया व कार्तिक बदी पंचमी के दिन श्री बालाजी महाराज की आज्ञा लेकर उन्ही की उपस्थिति मेँ प्रभुनाम स्मरण करते हुए ईश्वर मेँ लीन हो गये ।परसनेऊ धाम मेँ उनके समाधि स्थल पर एक गुमटी बना दी गई जो आज एक विशाल मन्दिर का रुप धारण कर चुकी हैँ । श्री दादाजी महाराज का चीमटा और खङाऊँ आज भी दर्शनार्थ मन्दिर मेँ रखे हुये हैँ ।

श्री दादाजी महाराज के जन्म दिवस भादवा बदी पंचमी एवमं आसोज माह मेँ श्राद्ध (आसोज बदी पंचमी) पंचमी पर परसनेऊ धाम मेँ भव्य मेलोँ का आयोजन होता हैँ । श्री दादाजी महाराज की कृपा से सांप ,गोह (गोयरा) द्वारा डसे गये गम्भीर से गम्भीर रोगी मात्र श्री दादाजी महाराज की कलवाणी पीने से ठीक हो जाते हैँ। श्री दादाजी महाराज की मात्र तांती बांधने से अनेक बिमारीयो से छुटकारा मिलता हैँ । श्री दादाजी महाराज के मन्दिर के पास ही जिऊ बाई के द्वारा लगाया गया बैर का पेङ जो आज भी मौजुद हैँ जिसका एक पत्ता मात्र खाने से काली खांसी एवमं पेट के असाध्य रोगो मे लाभ मिलता हैँ । श्री दादाजी महाराज के श्राद्ध के प्रसाद(लापसी) की ऐसी मान्यता हैँ की अगर जरा भी लापसी का प्रसाद खाने को मिल जाये तो 12 मास व्यक्ति रोगो से दुर रहता हैँ । श्री दादाजी महाराज गायेँ चराते थे एवमं गरीबो ,निशक्तो एवमं कमजोरो के दास थे । उनके पद चिन्हो पर चलते हुऐ गाँव मेँ 'अक्षय कृष्ण गौशाला ' एवमं 'दादा अक्षय विकलांग सेवा संस्थान परसनेऊ ' सुचारु रुप चल रही हैँ ।

परसनेऊ धाम रतनगढ-बीकानेर हाईवे व रेल मार्ग पर स्थित हैँ ।छापर से वाया राजलदेसर व बिदासर से सीधा सङक मार्ग परसनेऊ जाता हैँ । ठहरने के लिये धर्मशाला व जल आदि की उत्तम व्यवस्था हैँ ।

आपसे विनम्र प्रार्थना हैँ कि सपरिवार सिद्धपीठ परसनेऊ धाम पधार कर अपनी मनोकामनाएँ पूर्ण करेँ व श्री दादाजी अखाराम जी महाराज द्वारा चलाई भक्ति की पावन धारा को आगे चलायेँ । लिखने मेँ हुई समस्त भुलोँ के लिये श्री अखाराम जी दादाजी महाराज व आप सभी भक्तगण मुझे क्षमा करेँ । जय श्री अखाराम जी दादोजी महाराज की जय हो

 

दादाजी की कुछ निशानियाँ

दादाजी के समय की कुछ निशानियाँ जो अभी भी परसनेऊ धाम में विराजित हैं और उनके दर्शन मात्र से भक्तों के दु:ख दूर हो जाते हैं।

(1) पंचांग शंख
(2) चिमटा
(3) बेरी की खेजड़ी

 

दादाजी के तीन वचन

दादाजी ने समाधि लेते समय दादाजी से तीन वचन मांगे थे जिससे वो उनके भक्तों की सदैव रक्षा करते रहेगें।

(1) परसनेऊ धाम में कभी आग नहीं लगेगी।
(2) कभी दूध नहीं उफनेगा।
(3) साँप का काटा ठीक हो जायेगा।

आज भी दादाजी महाराज के चमत्कार से कितना भी जहरीला साँप खा जाये तो पीडित व्यक्ति को उनकी कलवाणी रूपी प्रसाद देते ही वो ठीक हो जाता है।

 

दादाजी श्री अखारमजी की पूजा विधि

बहुत से श्रद्धालु भक्तों की जिज्ञासा और आग्रह पर हम श्री दादाजी अखारामजी की पूजन विधि दे रहे हैं, आशा है कि इसके द्वारा वे कुछ लाभ उठापायेंगे।

1- श्री अखाराम जयन्ती ( भादव बदी पंचम ) को कीर्त्तन-भजन का आयोजन कर व्रत एवं व्रत रखकर जन्मोत्सव मनाना चाहिए।
2- दादा के मन्दिर में जाकर सिगड़ी के दर्शन का लाभ उठावें, किसी कारण वश जो भक्त न जा पावें, वे घर पर छवि के सामने धूप-दीप-नैवेद्य व श्रद्धा के पुष्प चढ़ाकर पूजा करें।
3- प्रत्येक मंगलवार/शनिवार व प्रत्येक मास की कृष्ण पक्ष की पंचमी को दादाजी की छवि को सामने रखकर ज्योत लेनी चाहिए।
ज्योत लेते समय Þ ऊँ सर्व सिद्धाय श्री अक्षय नम: स्वाहा ß का उच्चारण कर ज्योत में घृत दें, अगर हो सके तो व्रत भी रखें।
4- स्थान व समय का बन्धन न रखकर आरती व चालीसा का नित्य पठन करना चाहिए।संभव हो तो पाठ प्रात: , मध्यान्ह एवं सायंकाल करना चाहिए।
5- Þ ऊँ श्री सर्व सिद्धाय अक्षय नम: ß मंत्र या Þ ऊँ तत्सत् श्री अक्षय नम: ß महामंत्र का जाप ग्यारह हजार, सवा लाख अथवा चौबीस लाख अपनी श्रद्धा व शक्ति के अनुसार अभीष्ट कार्य की सिद्धि के लिये करना चाहिए।
6- दादाजी अखारामजी चालीसा का 108 अथवा 1100 पाठ अपनी शक्ति के अनुसार करना चाहिए या कराना चाहिए।

Akharam Ji : One of most legent person of Dadhich Samaj
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भक्त शिरोमणि श्री दादाजी अखारामजी महाराज परसनेऊ गांव के पास ही नाडिया (तालाब) के समीप कैर व कमुठोँ के पास श्री बालाजी महाराज की धुणी रमाते एवं गायेँ चरातेँ थे ।श्रीदादोजी महाराज को गाँव के नागरिक गुंगीया (भोला) कहकर पुकारते थे ।

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सर्प आदि के जहर व भुतप्रेत आदि के प्रभाव से मुक्ति के लिये भभूति व कलवाणी रुपी औषध का वरदान दिया जिससे आज भी वहां भक्तोँ के दुःख क्षणभर मेँ कट जाते हैँ ।

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श्री दादाजी महाराज के श्राद्ध के प्रसाद(लापसी) की ऐसी मान्यता हैँ की अगर जरा भी लापसी का प्रसाद खाने को मिल जाये तो 12 मास व्यक्ति रोगो से दुर रहता हैँ ।

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श्री दादाजी महाराज के जन्म दिवस भादवा बदी पंचमी एवमं आसोज माह मेँ श्राद्ध (आसोज बदी पंचमी) पंचमी पर परसनेऊ धाम मेँ भव्य मेलोँ का आयोजन

  • श्री दादाजी महाराज को वचन सिद्धि प्रदान की
  • भभूति व कलवाणी रुपी औषध का वरदान
  • गरीबो ,निशक्तो एवमं कमजोरो के दास
  • गाँव मेँ 'अक्षय कृष्ण गौशाला '
  • 'दादा अक्षय विकलांग सेवा संस्थान परसनेऊ '
  • ठहरने के लिये धर्मशाला व जल आदि की उत्तम व्यवस्था
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अपनी अस्थियों का दान करने वाले एकमात्र ऋषि महर्षि दधीचि को माना जाता है। प्रतिवर्ष भादव सुदी अष्टमी को पूरे देश में उनके वंशज माने जाने वाले दाधीच उनकी जंयती धूमधाम से मनाते है।

Dec 2011, Jaipur

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श्री दादाजी महाराज गायेँ चराते थे एवमं गरीबो ,निशक्तो एवमं कमजोरो के दास थे ।

Jan 2012, Barmer

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सपरिवार सिद्धपीठ परसनेऊ धाम पधार कर अपनी मनोकामनाएँ पूर्ण करेँ व श्री दादाजी अखाराम जी महाराज द्वारा चलाई भक्ति की पावन धारा को आगे चलायेँ

March 2012, Chittorgarh

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दधीचि ने कहा कि मै देवलोक की रक्षा के लिए क्या कर सकता हू देवताओ ने उन्हे ब्रहमा विष्णु व महेश की कही बाते बताई तथा उनकी अस्थियो का दान मांगा।

May 2012, Ajmer

Pujari Pariwar
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