www.akshaykripa.com

जय श्री बालाजी । जय श्री दादोजी । "www.akshaykripa.com" वेबसाईट में दिखाये जाने वाले फोटो तथा विडियो एवं दादोजी श्री अखाराम जी के चमत्कारिक भक्ति, शक्ति और भावनात्मक उल्लेख उनके श्रध्दालुओं की आपबीती घटनाओ से सम्बन्धित है । हम किसी व्यक्ति तथा समुदाय की भावना को ठेस पहुँचाना नही चाहते है । हम सिर्फ दादोजी के भक्तों की आस्था और मान्यताओं को दिखा रहे है । इसमे हम किसी भी तरह का दावा नही करते है एवं किसी भी व्यक्ति तथा समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुँचे तो हम क्षमाप्रार्थी है ।

Aarti & Bhajan

जय जय जनक सुनन्दिनि, हरि वनन्दिनि हे । दुष्ट निकन्दिनि मात, जय जय विष्णु प्रिये ॥
Jai Jai Janak Sunandini, Hari Vnandini.He Dust Nikndini maat, Jai Jai Vishnu Priye.
सकल मनोरथ दोहिनी, जग सोहिनी हे । पशुपति मोहिनी मात, जय जय विष्णु प्रिये ॥
Sakal Manorath Dohini, Jug Sohini He. Pashupati Mohini Maat, Jai Jai Vishnu Priye.
विकट निशाचर कुन्थिनि, दधिमन्थिनि हे । त्रिभुवन ग्रन्थिनी मात, जय जय विष्णु प्रिये ॥
Bikat Nisachar Kunthini, Dadhimanthini He. Tribhuvan Granthini Maat, Jai Jai Vishnu Priye.
दिवानाथ सम भासिनी, सुख हासिनि हे । मरुधर वासिनि मात, जय जय विष्णु प्रिये ॥
Diwanath Sam Bhasini, Sukh Hansini He. Marudhar Wasini Maat , Jai Jai Vishnu Priye.
जग्दम्बे जय कारिणि, खल हारिणि हे । म्रगरिपु चारिणि मात, जय जय विष्णु प्रिये ॥
Jagdmbe Jai Karini Khal Harini He. Mrgripu Charini Maat, Jai Jai Vishnu Priye.
पिप्प्लाद मुनि पालिनी, वपु शालिनि हे । खल दल दालिनि मात, जय जय विष्णु प्रिये ॥
Pipplad Muni Palini, vpu Shalini he Khal Dal Dalini Maat, Jai Jai Vishnu Priye.
तेज विजित सौदामिनि, हरि भामिनि हे । अयि गज गामिनि मात, जय जय विष्णु प्रिये ॥
Tej Vijit Sudamani Hari Bhamini He Ayi Gaja Gamini Maat, Jai Jai Vishnu Priye.
धरणी धर सुसहायिनि, श्रुति गायिनि हे । वांछित दायिनि मात, जय जय विष्नु प्रिये ॥
Dharani Dhar Sushayini, Shruti Gayini He. Vaanchit Dayini Maat,Jai Jai Vishnu Priye.

.........................................................................................................................................................

।।ऊँ।।

।।दादाजी सूँ अरज।।

दादाजी महाराज ! म्हारे आंगणो में आज्योयी। बालाजी महाराज ! म्हाने भूल मत जाज्योजी।।टेर।।

परसाणों शुभधाम आपरो , धोरे ऊपर सोवेजी।। पींपल री हरियाली साखी, कलवाणी री देवेजी।। अरज करां कर जोड़ म्हाने, आशीष देबा आज्योजी ।।1।।

आंधा-बहरा-लूला-लंगड़ा, धोक देवण आवेजी। स्याप गोयरा खायेड़ा आ, सामन पड़ ज्यावेजी।। मरेड़ा जी ज्यावे म्हाने, कला आपरी दिज्योजी।।2।।

अखारामजी रो अलबेलो, चीमटो खरणावेजी। सुबह-शाम गुमटी रे माही, धूप धूणो गरणावेजी।। पांच्यू और पूनमने म्हाने, परचो देवण आज्योजी।।3।।

कुण केवे है? जगत रा, थासूँ कोनी काम सरै। कुण केवे है? गांव गांव रा, थारे कोनी पाँव पड़े।। जीवू बार्इ रा बाीर म्हाने, भक्ति देबा आज्योजी।।4।।

बालाजी रो देवरो, नित, दादा नै बिडदावेजी। अंजनी सुत री मुरत आगे, जागणियां हुमुवेजी।। म्हे तो थारा टाबर म्हाने, ज्ञान देवा आज्योजी।।5।।

इं धरती रै मांय दादाजी, समाधि थे लिन्ही जी। चोलो चीमटी और खड़ाऊ, निशनी थे दिन्ही जी।। राधाकृष्ण तो केवे म्हाने, शक्ति देवा आज्योजी।।6।।

.........................................................................................................................................................

श्री दादाजी अखाराम चालीसा

।।दोहा।।

अक्षय तेरा कोष है, अक्षय तेरा नाम।
अक्षय पलकें खोल दे, अक्षय दे वरदान।

.........................................................................................................................................................

।।चौपार्इ।।

जय अक्षय हरजी सुत देवा। शीश नवायें, करते सेवा।।1।।
जय मारुति सेवक सुखदायक। जय जय जय अंजनि सुत पायक।।2।।
जय जय संत शिरोमणि दाता। जय जीवू बार्इ के भ्राता।।3।।
जय हरजी सुत कीरति पावन। त्रिभुवन यश सब शोक नसावन।।4।।
जय हनुमत चरणों के दासा। पूर्ण करो सब मन की आशा।।5।।
जय तुम कींकर महावीर का। सरजीवन है किया नीर का।।6।।
जय तुम पौत्रवंश सुखदायक। महावीर सेवक कुलनायक।।7।।
संवत पन्द्रह सौ पचास में। भादव बदी पंचमी प्रात: में ।।8।।
परसाणें से नाम ग्राम में । जन्मे प्रभुजी धरा धाम में।।9।।
कृष्ण पक्ष शुभ घड़ी लग्न में। लियो जन्म हरजी आंगन में ।।10।।
नाम दिया पिता ने अक्षा। सुमिरन से करते हो रक्षा।।11।।
सरल नाम तव अखाराम है। करते सुमिरन सुबह शाम है।।12।
दिव्य ललाट केशर का टीका । कटी पीताम्बर सोहे निका।।13।।
हाथ छड़ी गल माला सोहे। पंचरंग पाग भक्त मन मोहे।।14।।
सुन्दर राजे गले जनेऊ। रेशम जामा, पगां खड़ाऊँ ।।15।।
छड़ी चिमटा है विष हर्ता। दुखित जनों के पालन कर्ता ।।16।।
तांती और भभूति नीकी। दलन रोग भव मुरि अमीसी ।।17।।
डेरी माँर्इ गऊ चरार्इ। घूणी पर नभ वाणी सुनार्इ ।।18।।
तपबल से कपि दर्शन पाया। मूरत ले परसाणे आया ।।19।।
भानु दिशा मुख बजरंग कीन्हा। ध्रुव दिश देवल तुमको दीन्हा ।।20।।
सन्मुख पीपल है बजरंग के। हरे खेजड़ी अवगुण चित्त के ।।21।।
बेरी तरु की महिमा भारी। कफ दोषन को टारनहारी ।।22।।
पोल एक पुरब मुख सोहे। मंदिर छवि भक्तन मन मोहे ।।23।।
अमृत कुण्ड और धर्मशाल है। शुभ सुन्दर मन्दिर विशाल है ।।24।।
पूनम, मंगल, शनिवार है। मंदिर दर्शन की बहार है ।।25।।
रात्रि जागरण भजन सुनावै। जो सेवक मांगे सोर्इ पावै ।।26।।
पौत्र, प्रपौत्र, बहू सब आते। कर दर्शन सब मंगल गाते ।।27।।
श्री फल लड्डू भोग चढ़वे। मनवाँछित फल सो नर पावै ।।28।।
द्वार पितामह के जो आवे । बिन मांगे सब कुछ पा जावे ।।29।।
कृष्ण पक्ष पंचमी का मेला। कोर्इ युगल, कोर्इ भक्त अकेला।।30।।
दादा तेरा अमर नाम है। प्रतिपल मुख पर राम राम है ।।31।।
हुकमचंद सुत रामबगस के। विषधर गया पैर में डसके ।।32।।
रोम रोम विष मूँजा फूटा। व्याकुल भए, धीरज मन छूटा ।।33।।
जब कलवाणी दी तत्काला। जैसे तेल दिये बीच डाला ।।34।।
ऐसे काज अनेकों सारे। ते मम ते नहीं जाये उचारे ।।35।।
बैंडवा में भी आज बिराजे। अगणी गुमटी छापर राजे ।।36।।
प्रात: सांय सिगड़ी के दर्शन। तापर लक्ष्मी होती परसन ।।37।।
कर दे दादा वरद हस्त अब। अभय दान दीजे अक्षय तब ।।38।।
कीड़ कांट प्रभु रक्षा करते । भूत-प्रेत भय व्याधा हरते ।।39।।
देश विदेश जहाँ जो ध्यावे । चम्पा सुखद परम पद पावे ।।40।।

.........................................................................................................................................................

।।दोहा।।

तुम हो दया निधान प्रभु, मैं मूरख अज्ञान।
भूल चूक सब क्षमा करो, पौत्र वंश तव जान।।

.........................................................................................................................................................

।।गुरू वन्दना।।

आछौ लागेजी दादाजी थारो धाम,
धोरे पर बण्यो शुभ सुन्दरम्।
परसनेऊ म पीपल सारै, भला विराज्या आप।
पक्के मन्दिर ऊपर दादा, ध्वजा फहराये फर-फर।।
धोरे पर बण्यो शुभ सुन्दरम्.....
अखारामजी नाम आपको, अक्षय हो गयो नाम।
मोटे धणी ने बस में करयो निसदिन सेवा कर-कर।।
धोरे पर बण्यो शुभ सुन्दरम्.....
चोलो चिंपटो ओर खड़ाऊँ, निरधरिया आधार।
भक्त घणा बिड़दावै थानै, सद्भावना स भर-भर।।
धोरे पर बण्यो शुभ सुन्दरम्.....
पाँचू पूनम मेलो लागे, थारा धाम रे माय।
पून्यार्इ री पींढ़या थारी, थां जिसा पाया नर-नर।।
धोरे पर बण्यो शुभ सुन्दरम्......
दूर-दूर से आवै यात्री, दर्शन करवां तांय।
जात झडूला देकर ज्यावे श्रीफल प्रसादी घर-घर।।
धोरे पर बण्यो शुभ सुन्दरम्.....
एक अजब वरदान दिया दादा सेवकड़ा न आपकलवाणी रा करी कल्पना, पाछा ज्यावै मर-मर।।
धोरे पर बण्यो शुभ सुन्दरम्......
दादाजी के छोटी गुमटी, बालाजी के साथ।
जन-जन रे मन-मन में दादा, सोभा छार्इ घर-घर
धोरे पर बण्यो शुभ सुन्दरम्.......
सेवक रा थे सेवक साच्चा, सकल कला सी मोह।
अर्ज करां कर जोड़ आप ने, चरणा म माथो घर-घर।।
धोरे पर बण्यो शुभ सुन्दरम्........

.........................................................................................................................................................

आरती दादाजी श्री अखारामजी महाराज की

( श्री अक्षये पितामहाय नम: )

आरती हरजी नंदन की दधीचि कुल, गौरव संतन की ।।टेर।।
गले में तुलसी की माला । चीमटा रत्न जड़ित बाला।
भाल पर तिलक गंध आला।
खड़ाऊँ चंदन, काटते फंदन, करें हम वन्दन,
पितामह कष्ट निकन्दन की । दधीचि कुल गौरव संतन की ।।1।।
रेशमी पीताम्बर सोहे। र्इंदु सम मुख मन्डल मोहे।
कमल सम नेत्र धनुष भौहें।
प्रभु का भजन, ध्यान में मगन, मारूत सुत
लगन, पवन सुत किकंर संतन की।
दधीचि कुल गौरत संतन की ।।2।।
शेभितम् ब्रह्मसुत्र दाता। नाम अखाराम सुखदाता
स्मरण से नवनिधियां पाता। जिवु के भ्रात, सुमिरते प्रात, तुम्हीं
पितुमात, तुम्हारे सेवक भक्तन की। दधीचि कुल गौरव संतन की ।।3।।
परसाणे सिंगड़ी जोत दादा। कटे विष भूत प्रेत व्याधा।
कलवाणी अमृत जो पाता। तांती है नीकी, भभूति अमीसी
प्राण में रमीसी, काटती भवभय बंधन की
दधीचि कुल गौरव संतन की।।4।।
पंचमी कृष्ण पक्ष सेवे। मिठार्इ श्रीफल ध्वजा मेवे।
झडूला युगल जात देवे। हूकम का तनय, चंपा करे विनय, पौत्र
की सुनिए, श्रीराम के पूजन बन्दन की
दधीचि कुल गौरव संतन की।।5।।

.........................................................................................................................................................

।।श्री अक्षय नम:।।

श्री दादाजी विरुदावली

पिता हरजौरामजी , अखारामजी नाम। जीवू बार्इ भ्रात को, कोटि कोटि प्रणाम।।1।।
परसनेऊ शुभधाम है , बण्डवा सेवाग्राम। छापर में सेवक घने, गूँजे घर घर नाम।।2।ं।
दादाजी महिमा अमित , भावे आठो याम। बालाजी की भक्ति से , अक्षय हुआ स्वनाम ।।3।।
अंजनी सुत के दास हो, रहते हरदम पास। करामात कलवाणी की, चलती बारहों मास ।।4।।
युगल धाम सुहावने , पीपल की है छाँव । बालाजी-दादाजी के , रोज पूजते पाँव ।।5।ं।
म्हे तो चाकर आपरा, महर करीज्यो आय । माथे हाथ फेरज्यो, सै संकट मिट ज्याय ।।6।ं।
एक आपरो आसरो, एक आपरो आश । एक आपरी भक्ति को, सदा रहे विश्वास ।।7।ं।

.........................................................................................................................................................

सोरठा

धोरे ऊपर धाम, चिमटो चोखो काम करै। परसनेऊ हे ग्राम, सेवक नित चरणन परै।।

 

Akharam Ji : One of most legent person of Dadhich Samaj
Video
Social Media
proImg

भक्त शिरोमणि श्री दादाजी अखारामजी महाराज परसनेऊ गांव के पास ही नाडिया (तालाब) के समीप कैर व कमुठोँ के पास श्री बालाजी महाराज की धुणी रमाते एवं गायेँ चरातेँ थे ।श्रीदादोजी महाराज को गाँव के नागरिक गुंगीया (भोला) कहकर पुकारते थे ।

proImg

सर्प आदि के जहर व भुतप्रेत आदि के प्रभाव से मुक्ति के लिये भभूति व कलवाणी रुपी औषध का वरदान दिया जिससे आज भी वहां भक्तोँ के दुःख क्षणभर मेँ कट जाते हैँ ।

proImg

श्री दादाजी महाराज के श्राद्ध के प्रसाद(लापसी) की ऐसी मान्यता हैँ की अगर जरा भी लापसी का प्रसाद खाने को मिल जाये तो 12 मास व्यक्ति रोगो से दुर रहता हैँ ।

proImg

श्री दादाजी महाराज के जन्म दिवस भादवा बदी पंचमी एवमं आसोज माह मेँ श्राद्ध (आसोज बदी पंचमी) पंचमी पर परसनेऊ धाम मेँ भव्य मेलोँ का आयोजन

  • श्री दादाजी महाराज को वचन सिद्धि प्रदान की
  • भभूति व कलवाणी रुपी औषध का वरदान
  • गरीबो ,निशक्तो एवमं कमजोरो के दास
  • गाँव मेँ 'अक्षय कृष्ण गौशाला '
  • 'दादा अक्षय विकलांग सेवा संस्थान परसनेऊ '
  • ठहरने के लिये धर्मशाला व जल आदि की उत्तम व्यवस्था
proImg

अपनी अस्थियों का दान करने वाले एकमात्र ऋषि महर्षि दधीचि को माना जाता है। प्रतिवर्ष भादव सुदी अष्टमी को पूरे देश में उनके वंशज माने जाने वाले दाधीच उनकी जंयती धूमधाम से मनाते है।

Dec 2011, Jaipur

proImg

श्री दादाजी महाराज गायेँ चराते थे एवमं गरीबो ,निशक्तो एवमं कमजोरो के दास थे ।

Jan 2012, Barmer

proImg

सपरिवार सिद्धपीठ परसनेऊ धाम पधार कर अपनी मनोकामनाएँ पूर्ण करेँ व श्री दादाजी अखाराम जी महाराज द्वारा चलाई भक्ति की पावन धारा को आगे चलायेँ

March 2012, Chittorgarh

proImg

दधीचि ने कहा कि मै देवलोक की रक्षा के लिए क्या कर सकता हू देवताओ ने उन्हे ब्रहमा विष्णु व महेश की कही बाते बताई तथा उनकी अस्थियो का दान मांगा।

May 2012, Ajmer

Pujari Pariwar
proImg proImg proImg proImg proImg proImg proImg proImg proImg
List Your Business
List Your Business
web site visitor statistics
Akshay Kripa
© Copyright 2013 Akhasyakripa. All rights reserved